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The Josephine Porter Institute

सूर्य रहस्य और मृत्यु एवं पुनरुत्थान का रहस्य, रुडोल्फ स्टीनर द्वारा, संग्रहित कृतियाँ 253 CW253

सूर्य रहस्य और मृत्यु एवं पुनरुत्थान का रहस्य, रुडोल्फ स्टीनर द्वारा, संग्रहित कृतियाँ 253 CW253

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विवरण

विभिन्न शहरों में 12 व्याख्यान, 1922 (सीडब्ल्यू 211)
"हमें यह समझना होगा कि अगर हम केवल मृत पदार्थ से ही संबंध रखते हैं, तो हम स्वयं मृत और अहिर्मनी बन जाते हैं, लेकिन अगर हमारे अंदर अपने आस-पास के सभी प्राणियों के प्रति इतना साहस और प्रेम है कि हम उनसे सीधे संबंध बना सकें (उनके बारे में अपने मृत विचारों से नहीं), तो हम हर चीज़ में मसीह और हर जगह विजयी भावना को खोज लेते हैं। जब ऐसा होता है, तो हमें ऐसे तरीकों से बात करनी पड़ सकती है जो हमारे समकालीनों को विरोधाभासी लगें। हमें उन व्यक्तिगत आध्यात्मिक प्राणियों के बारे में बात करनी पड़ सकती है जो ठोस और तरल तत्वों आदि में रहते हैं। जब तक हम इन प्राणियों के बारे में बात करने से बचते हैं, हम एक मृत विज्ञान के बारे में बात कर रहे हैं जो मसीह से ओतप्रोत नहीं है। उनके बारे में बात करना सच्चे ईसाई अर्थ में बात करना है। हमें अपनी सभी वैज्ञानिक गतिविधियों को मसीह से ओतप्रोत करना चाहिए। इससे भी बढ़कर, हमें अपने सभी सामाजिक प्रयासों, अपने सभी ज्ञान में, संक्षेप में, अपने जीवन के सभी पहलुओं में, मसीह को लाना चाहिए। गुलगोथा का रहस्य वास्तव में केवल मानवीय शक्ति, मानवीय प्रयासों और एक-दूसरे के प्रति मानवीय प्रेम के माध्यम से ही फलित होगा। इस अर्थ में, मानवशास्त्र अपने सभी विवरणों में प्रयास करता है दुनिया को मसीह से भर देना।” ―रुडोल्फ स्टीनर

ये व्याख्यान प्रथम विश्व युद्ध और 1925 में स्टाइनर की मृत्यु के बीच के समय में दिए गए थे। ये उन सभी के लिए विशेष रूप से रुचिकर होंगे जो रुडोल्फ स्टाइनर की अपने मिशन: विश्व को "ईसाई धर्म में परिवर्तित" करने की परिपक्व समझ को समझना चाहते हैं। पहले दो व्याख्यान हथियार उठाने या मूल सिद्धांतों की ओर लौटने का आह्वान करते हैं। स्टाइनर अस्तित्वगत और परिघटनागत रूप से बोलते हैं, वास्तविक अनुभवों के पहचाने जाने योग्य विवरणों पर आधारित। उनका विषय चेतना की तीन अवस्थाएँ (जागृत, स्वप्न और स्वप्नहीन निद्रा) हैं, और वे दर्शाते हैं कि कैसे इन सामान्य मानवीय क्रियाओं में आरंभिक संभावनाएँ होती हैं।

अगले चार व्याख्यान ईसा मसीह की घटना के सार्वभौमिक महत्व के संबंध में चेतना के विकास पर केंद्रित हैं। पुनरुत्थान के माध्यम से, ईसा मसीह का अस्तित्व पार्थिव विकास में प्रवेश कर गया। परिणामस्वरूप, हम दुनिया को अलग नज़रिए से देखते हैं। जहाँ प्राचीन मानवता ने अनुभव किया था, "मैं नहीं, बल्कि मेरे चारों ओर दिव्य आत्मा है," वहीं हम अनुभव कर सकते हैं, "मैं नहीं, बल्कि मुझमें ईसा मसीह हैं।" इस अंतर्दृष्टि के साथ, हम इस पुस्तक के केंद्र तक पहुँचते हैं—गूढ़ ईसाई धर्म।

स्टाइनर के अनुसार, मनुष्य होने के नाते हमारा सबसे महत्वपूर्ण कार्य मसीह के साथ एकाकार होकर मृत्यु पर विजय प्राप्त करना सीखना है, जिन्होंने मृत्यु पर विजय प्राप्त की। मानवता का अस्तित्व संसार के "ईसा मसीहीकरण" पर निर्भर करता है। मानवदर्शन का उद्देश्य इस वास्तविकता को विश्व विकास में लाना है, ताकि सभी धर्म और सभी मनुष्य इस नई वास्तविकता का अनुभव कर सकें।

Frequently Asked Questions

What material is collected in The Sun Mystery and the Mystery of Death and Resurrection?

The volume brings together twelve lectures Rudolf Steiner gave in 1922, published as Collected Works 211, on consciousness, the Christ event, death, and resurrection.

How does Steiner connect waking, dreaming, and dreamless sleep with spiritual development?

Steiner begins with these familiar states of consciousness and describes the initiatory possibilities they hold for deeper spiritual understanding.

How does the book describe the evolution of consciousness?

It traces a movement from an ancient experience of the divine spirit surrounding the human being toward an inward experience Steiner expresses as “the Christ in me.”

What does “enchristing” the world mean in this volume?

In Steiner’s account, it means bringing Christ-centered spiritual awareness into science, social life, knowledge, and the full range of human experience.