यह क्लासिक कृति वनस्पति जगत का गहन अध्ययन करती है। यह प्रकृति के जीवन भर के धैर्यपूर्ण और विस्तृत अवलोकन का फल है। पहला खंड पुष्पित पौधों से शुरू होता है, और फिर पृथ्वी के जीवंत स्वरूप की ओर मुड़ता है।
इसके बाद ग्रोहमान पौधों की त्रिगुणात्मक प्रकृति और मानव की प्रकृति पर विचार करते हैं। अंत में, "वनस्पति जगत की सीढ़ी" का वर्णन है। दूसरे खंड में पौधों का और अधिक विवरण दिया गया है और पहले खंड में शुरू किए गए ब्रह्माण्ड संबंधी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया गया है।